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लाडकी बहिन योजना बंद होगी? — जो लोग डरा रहे हैं, सच जानो उनका

लाडकी बहिन योजना बंद होगी? — जो लोग डरा रहे हैं, सच जानो उनका

लाडकी बहिन योजना बंद होगीमहाराष्ट्र की लाखों महिलाओं के WhatsApp पर एक message घूम रहा है — “लाडकी बहिन योजना बंद हो रही है, पैसे मिलने बंद!” अगर तुमने भी यही सुना है, तो एक बार रुको। क्योंकि यह सच नहीं है — और इसके पीछे एक बड़ी राजनीति है जो तुम्हें जाननी चाहिए।

सरकार ने साफ कह दिया है — यह योजना बंद नहीं होगी। और यह बात सिर्फ एक नेता ने नहीं, बल्कि एक के बाद एक दो बड़े नेताओं ने publicly कही है। तो फिर यह अफवाह कहां से आई? कौन फैला रहा है? और क्यों? — यही आज हम समझेंगे।

एकनाथ शिंदे ने क्या बोला था?

बात शुरू हुई गुरुवार से, जब Deputy CM एकनाथ शिंदे ने अहमदपुर में एक शिवसेना रैली को address किया। शिंदे ने बिना लाग-लपेट के कहा — किसानों और महिलाओं को किसी भी हाल में अकेला नहीं छोड़ा जाएगा।

उन्होंने यह भी कहा कि किसान देश के लिए धूप-बारिश में मेहनत करता है, natural disasters उसे कर्ज में धकेल देती हैं — इसीलिए राज्य के खजाने पर किसानों का पहला हक है। और साथ में directly विपक्ष पर निशाना साधा कि वो लाडकी बहिन योजना, किसान कर्ज माफी और फसल बीमा जैसे topics पर जनता को गुमराह कर रहे हैं।

यानी शिंदे का message clear था — योजना चलती रहेगी, और जो डरा रहे हैं वो झूठ बोल रहे हैं।

फिर संजय निरुपम ने दोहराया — और तेज आवाज में

शिंदे की बात के अगले ही दिन, शिवसेना के spokesperson संजय निरुपम ने भी यही बात दोहराई — लेकिन और direct tone में।

निरुपम ने कहा: “विपक्ष और कुछ लोग महाराष्ट्र सरकार की लाडकी बहिन योजना के बारे में भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पहले ही साफ कर चुके हैं — यह योजना बंद नहीं होगी। हर परिस्थिति में, सरकार माताओं और बहनों को financial support देती रहेगी।”

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि महाराष्ट्र की economic condition के बारे में झूठे narrative जानबूझकर spread किए जा रहे हैं — ताकि beneficiaries के मन में डर बैठे और वो सरकार से नाराज हों।

सोचो — यह game कितना calculated है। पहले झूठ फैलाओ, फिर महिलाओं को insecure करो, फिर कहो “देखो सरकार ने धोखा दिया।”

लाडकी बहिन योजना है क्या — जिनको नहीं पता उनके लिए

Maharashtra government की यह flagship scheme महिलाओं को monthly financial assistance देती है। यह योजना खासतौर पर उन महिलाओं के लिए है जो economically कमजोर हैं और जिन्हें direct cash support की जरूरत है।

इस scheme ने 2024 के Maharashtra assembly elections में ruling Mahayuti alliance के लिए एक बड़ा political role भी play किया था। लाखों महिलाएं इस scheme की beneficiary हैं — इसीलिए opposition के लिए यह एक easy target है। अगर महिलाओं को डरा दो कि पैसे बंद होंगे, तो directly उनका vote shift हो सकता है।

यही politics हो रही है।

विपक्ष की strategy — डराओ, confuse करो, vote लो

यह नया नहीं है। India की politics में welfare schemes को लेकर यह game लंबे समय से चलता आ रहा है। जब भी ruling party कोई popular scheme launch करती है — opposition उसे financially unsustainable बताता है, बंद होने की अफवाह फैलाता है, और media में एक negative narrative build करता है।

महाराष्ट्र में अभी यही हो रहा है। सुप्रिया सुले और MVA जैसे opposition leaders ने यह claim किया था कि 80 लाख beneficiaries का payment रुका हुआ है। इस बयान ने social media पर आग लगा दी थी।

लेकिन सरकार का कहना है — यह deliberately misleading है। Payment technical और administrative processes की वजह से कभी-कभी delay होती है, लेकिन scheme बंद नहीं हुई और होगी भी नहीं।

अमित शाह वाला angle — निरुपम ने यह भी बोला

इसी press conference में संजय निरुपम ने और भी कई topics cover किए। उन्होंने Home Minister अमित शाह के उस statement का support किया जिसमें शाह ने कहा था कि illegal infiltrators को voluntarily अपने देश वापस जाना चाहिए — legal action से पहले।

निरुपम का कहना था कि West Bengal में government change होने के बाद Bangladeshi घुसपैठियों के खिलाफ strict action शुरू होगा। उन्होंने national security और demographic balance का हवाला देते हुए कहा कि पूरे देश में fake documents पर रह रहे infiltrators के खिलाफ एक nationwide crackdown होनी चाहिए।

Karnataka political drama — Siddaramaiah के बाद क्या?

निरुपम ने Karnataka पर भी comment किया। CM पद से Siddaramaiah के हटने के बाद निरुपम ने कहा — “Karnataka में political drama अभी खत्म नहीं हुआ।”

उनका point था — Siddaramaiah ने Rajya Sabha offer ठुकरा दिया है, जिससे यह साफ है कि वो state politics में active रहना चाहते हैं। और जब इतने powerful नेता की presence हो, तो नए CM के लिए effectively काम करना आसान नहीं होगा।

यह observation इसलिए important है क्योंकि Congress-ruled states में internal power struggles एक pattern बन गया है।

Pimpri-Chinchwad Hooch Tragedy — माफिया पर कार्रवाई की मांग

निरुपम ने Pimpri-Chinchwad में जहरीली शराब से हुई मौतों पर भी दुख जताया और कहा कि शराब अपने आप में harmful है, लेकिन जहरीली शराब directly जानलेवा है।

उन्होंने मांग की कि illegal liquor बनाने और बेचने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो। पूरे Maharashtra में जो liquor mafia active है — उस पर नकेल कसी जाए ताकि गरीब और आम लोगों की जान बचे।

Bottom Line — क्या करें तुम?

अगर तुम Ladki Bahin Yojana की beneficiary हो, या तुम्हारे घर में कोई है — तो किसी की WhatsApp forward पर मत जाओ। Government का official statement clear है। Scheme बंद नहीं हो रही।

और अगर payment में कोई delay है — तो वो process-related हो सकती है। अपने local government office या scheme portal पर check करो। Panic में आकर किसी political party का game मत बनो।

याद रखो — जो सबसे ज्यादा डराते हैं, वो ही सबसे ज्यादा mislead करते हैं।

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